दोस्तों भारत और जापान में क्या अंतर है कि जापान नित्य तरक्की के नए आयाम गढ़ रहा है और भारत संसाधन सपन्न होते हुए भी कोई विशेष तरक्की नहीं कर रहा है जबकि जापान में कोई न कोई आपदा निरंतर आती ही रहती है और भारत में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा भी नहीं आती है। दोस्तों इसमें एक विशेष अंतर है कि जो हमें बहुत ही बारिकी से समझना पड़ेगा इसके लिए हमें वहाँ कि कार्य संस्कृति को समझना होगा की वहां सोच क्या है????
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| स्रोत -गूगल इमेज |
जापान और भारत में तीन मूल कारणों से मै आपको स्पष्ट करने की कोशिश करूँगा कि जापान का हमेशा आगे बढ़ने का क्या कारण है-
पहला कारण - जापान का आदमी अपने देश के लिए पहले सोचता है और अपने लिए बाद में जबकि भारत में आदमी अपने लिए पहले सोचता है देश कहीं भी जाये उसे इससे कोई मतलब नहीं है।
दूसरा कारण- जापान में कोई भी अलसी नहीं है उदाहरण अगर वहाँ पर किसी की ड्यूटी का टाइम सुबह 8 बजे है तो कर्मचारी को हर हालत में 7:30 पर पहुंचना ही होता है अगर वह पुरे 8 बजे पहुँचता है तो उसको महा आलसी समझा जाता है और काम से निकल दिया जाता है जबकि भारत में हमेशा आदमी देरी से पहुँचने को ही अपनी शान समझता है और काम का आप सब को पता ही है।
तीसरा कारण - जापान में अगर किसी को सरकारी नौकरी मिलती है तो वह इसको अपने देश के लिए कुछ करने का मौका समझ कर करता है जबकि भारत में सरकारी नौकरी को पाने के कारण जब मै किसी से पूछता हूँ तो सोच अलग है क्या ????????कि सरकारी नौकरी एक बार मिल जाये तो बिना काम किये ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है या फिर नौकरी तो ज्यो टी त्यों बच जाती है और खर्चा ऊपर से निकल जाता है (यानि नम्बर दो की कमाई से )
इसलिए मेरे दोस्तों अगर हमें भी तरक्की करनी है तो पहले अपने देश की तरक्की के बारे में सोचने होगा यानि हमें सोचने की दिशा बदलनी होगी पहले देश फिर मै और मेरा परिवार तब जाकर हम अपने देश भारत को वहां देख सकते जहाँ हम देखना चाहते हैं यानि भारत विश्वगुरु तभी बन सकता है जब हम अपने अन्दर जापान जैसी देशभक्ति को अपने अन्दर समाहित कर लें।
दोस्तों आपको मेरा लेख कैसा लगा मुझे जरुर बताएं और जो अच्छा मै इसमें कर सकता हूँ इसके लिए कमेंट में सुझाव जरुर दें।

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