Tuesday, 2 September 2025

सोशल मीडिया में भ्रामक सूचनाओं का जाल




सोशल मीडिया में भ्रामक सूचनाओं का जाल       

      मित्रों भारत में 90 के दशक में संचार क्रांति आई इसने संचार व्यवस्था को नई जान एवं नई पहचान दी इससे पहले लोग घटनाओं या सूचनाओं की जानकारी के लिए पत्र  पत्रिकाओं व समाचार पत्रों पर निर्भर रहते थेI घटना की जानकारी भी तत्काल न मिलकर कुछ समय बाद ही  प्राप्त हो पाती थी परंतु एक जिज्ञासा एवं घटना को अंतर्मन से चित्रित करने का भाव पाठक के मन में रहता था I जब से भारत में संचार क्रांति आई एवं सूचना उपकरणों का विकास हुआ तब से एक क्लिक में ही हम सारी दुनिया से जुड़ चुके होते हैं यहां तक की घटनाओं का लाइव प्रसारण की भी व्यवस्था इस संचार माध्यमों के द्वारा हुई परंतु इसी बीच हमारे पास सूचनाओं के आदान-प्रदान का एक नया हथियार सोशल मीडिया के रूप में आया जिसने हमें घर बैठे एक ग्लोबल मानव बना दिया जिसमें सबसे अहम भूमिका निभाने का काम फेसबुक एवं व्हाट्सएप ने किया इसने समाज के प्रत्येक स्तर में अपनी पैठ बढ़ायी और प्रत्येक व्यक्ति को हर एक व्यक्ति से जोड़ दिया लेकिन मित्रो इसका सदुपयोग के साथ साथ दुरुपयोग अत्यधिक बढ़ गया जिस पर कोई नियंत्रण न तो इनके मालिक कर पाए और ना ही भारतीय सरकारे। व्हाट्सएप और फेसबुक एक ऐसा माध्यम बन गए जिसने पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, पुस्तको, टीवी न्यूज़ आदि से मोह भंग कर दिया कर दिया है। आज व्यक्ति सुबह उठते ही केवल व्हाट्सएप और फेसबुक चैक करता है ना कि समाचार पत्र परंतु सोशल मीडिया इतना भ्रामक सूचनाओं का जाल बन गया है कि व्यक्ति के पास कोई वीडियो या खबर आयी कि उसने उंगली घुमाई और तुरंत उसे आगे भेज दिया उसने उसकी सत्यता जांचने की कोई जहमत उठाना उचित नहीं समझा और जब वह असत्य पर आधारित वीडियो या मैसेज हम जैसे पढ़े-लिखे नौजवान आगे फॉरवर्ड करते हैं तो यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण हो जाता है क्योंकि समाज का एक तबका जो कम शिक्षित है परंतु इन सुचना उपकरणों से जुड़ा हुआ है। वह हमारी भेजी गई इन सूचनाओं पर केवल इसलिए विश्वास करता है क्योंकि हम पढ़े लिखे लोगों ने उसके पास भेजी है तो सत्य ही होगा। इससे समाज में कई बार इतनी द्वेष भावना बढ़ जाती है कि समाज में अलगाव पैदा हो जाता है यहाँ तक कि दंगे तक हो जाते हैं और यह सब पिछले दिनों में अगर आपने पत्र-पत्रिकाओं में ध्यान से पढ़ा होगा तो बहुत सारी खबरें ऐसी ही होंगी जिनमें झगड़े केवल गलत सूचनाएं प्राप्त होने के कारण हुए। इसका दुरुपयोग इतना बढ़ गया कि आतंकवादी तक अपने नुमाइंदों को इसी माध्यम से शिक्षण प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रहे हैं जो सरकार,शासन,प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया हैI

           Image source- Image taken from google.

 इसका एक उदाहरण मैं आपको बताता हूं कि मैं भी सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ा हुआ हूं तो मैं अपना व्हाट्सएप चेक कर रहा था तो एक पढ़े-लिखे ग्रेजुएट पोस्ट ग्रेजुएट नौजवानों के ग्रुप में एक वीडियो आया की बीजेपी की टोपी पहने कुछ लोग भारत माता की जय के नारों के साथ किसी चौराहे पर एक मूर्ति क्रेन के द्वारा गिरा रहे हैं जिसके साथ लिखा था इस पर मोदी जी क्या कहेंगे भाजपा नेता कर्णी सिंह डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की मूर्ति गिरा रहे हैं इस वीडियो को देखकर मैं चौंक गया कि ऐसा इन्होंने क्यों किया जिस व्यक्ति ने पूरा जीवन इस देश को बनाने में लगा दिया उसकी मूर्ति बीजेपी के नेता गिरा रहे हैं यह तो सरासर अन्याय है तभी मैंने इसकी सत्यता की पुष्टि करने के लिए अन्य माध्यमों की सहायता ली तो पता चला कि वह मूर्ति बाबा साहब की नहीं बल्कि लेनिन की है और वीडियो त्रिपुरा का है और अन्य भी इसी प्रकार के मैसेज आप पढ़ते होंगे कि ग्यारह लोगों को भेजो शुभ समाचार मिलेगा बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की मृत्यु की झूठी खबरें कई बार सोशल मीडिया में फैल चुकी हैं और पश्चिम बंगाल में तो कई घटनाएं इस प्रकार की हुई हैं जिनमें जिनमें बहुत बड़े दंगे हुए हैं यहां तक की जान माल की बड़ी हानि हुई है एक अन्य घटना अभी पिछले दिनों एक व्हाट्सअप्प ग्रुप में एक महोदय ने एक मेसेज भेजा कि जिस किसी बच्चे को किताब या फीस सम्बन्धी कोई समस्या हो तो हम उसकी मदद करेंगे और उसके साथ दस मोबाइल नम्बर की एक लिस्ट थी जिसको जांचने के लिए मैंने उन नम्बर को क्रमश मिलाया तो कोई भी नम्बर सही नहीं निकला इसी प्रकार बच्चा चोरी की अफवाहें बहुत बुरी तरह से फैली जिनके शिकार कहीं पर तो स्वयं पुलिसवाले और कुछ घटनाएँ तो एसी हुई कि बच्चे के अभिभावकों की ही इतनी पिटाई कर दी कि वह अपनी जान से हाथ धो बैठे तो मित्रों इसलिए मैंने सोशल मीडिया को भ्रामक सूचनाओं का जाल कहा और इसमें हम पढ़े लिखे लिखे नागरिकों की भूमिका बढ़ जाती है कि जो वीडियो या खबरें हमारे पास आती हैं पहले उन की सत्यता की जानकारी हम समाचार पत्रों, न्यूज़ पत्रिकाओं आदि को पढ़कर या व्यक्तिगत सम्बन्धो के आधार पर करें ताकि सही सूचनाएं आगे पहुंच सके और हमारे देश और समाज की एकता अखंडता और शांति पर कोई प्रहार न कर सके। 

कुलदीप वालदिया
सामाजिक कार्यकर्ता
खालिदपुर,बांसदेई,सहारनपुर 247341

बाढ़ व अत्यधिक बारिश के समय सावधानियां रखनी चाहिए क्या

🌧️ बाढ़ व अत्यधिक वर्षा के समय बरती जाने वाली सावधानियाँ

बाढ़ और अत्यधिक वर्षा प्राकृतिक आपदाएँ हैं जो जन-जीवन को गंभीर संकट में डाल देती हैं। ऐसे समय पर जान-माल का नुकसान कम करने के लिए सतर्क रहना और सही सावधानियाँ अपनाना बेहद ज़रूरी है।

1. पूर्व तैयारी:

मौसम विभाग की चेतावनियों और सरकारी निर्देशों पर ध्यान दें।

आवश्यक वस्तुएँ जैसे दवाइयाँ, सूखा भोजन, पीने का साफ पानी, टॉर्च और मोबाइल चार्जर पहले से तैयार रखें।

महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ व कीमती सामान सुरक्षित स्थान पर रख दें।


2. बाढ़ और बारिश के दौरान:

घर से अनावश्यक बाहर न निकलें।

खुले तारों, बिजली के खंभों और विद्युत उपकरणों से दूर रहें।

नालियों, गड्ढों और तेज बहाव वाले पानी में जाने से बचें।

यदि पानी से गुजरना ज़रूरी हो तो छड़ी/डंडे से रास्ता जांचकर धीरे-धीरे चलें।


3. स्वास्थ्य संबंधी सावधानियाँ:

दूषित पानी कभी न पिएँ, हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएँ।

मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी या रिपेलेंट का प्रयोग करें।

बारिश में भीगने से बचें, गीले कपड़े तुरंत बदलें ताकि संक्रमण या बीमारी न हो।


4. प्रशासनिक निर्देशों का पालन:

केवल सरकारी घोषणाओं पर विश्वास करें, अफवाहों से बचें।

राहत शिविर या सुरक्षित स्थान पर समय पर पहुँचें।


👉 इन सरल सावधानियों को अपनाकर बाढ़ और अत्यधिक वर्षा के दौरान अपने व अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।